शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

तेरी नज़दीकियों से तो भली थी दूरियाँ,
वक्त बेवक्त तकती थी राहें मेरी मज़बूरियाँ,
इल्ज़ाम भी ऐसे थे बेगैरतों की तरह,
उबलते इश्क़ में कोई फेंक दे इंकार के बर्फ जैसे,
फुरसत के पलों में फिर से ढूंढते है पल चैन वाले,
ना हो मुनासिब तो भी बना देते लम्हा मेरा खुशनुमा सा,
सुन गैर सा ना बन विदेसिया तेरे माटी की खुशबु हूँ मैं,
मैं वक्त तेरा, एहसास तेरी, जरुरत से बढ़कर हूँ मैं,
तुझसे बढ़ी दूरियों में शामिल लम्हा ऐ इंतज़ार हूँ मैं,
वक्त बेवक्त तकती राहों में रखे हुए मील का पत्थर हूँ मैं...



गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

चल आ, संग बैठ.....

चल आ, संग बैठ,
फिर खेले साथ मिल कर खेल वो बचपन के,
फिर से कोरे कागज़ पे उकेरे लकीरें टेढ़े मेढ़े,
फिर से अंजाम दे, अपने पाक वादों को मिल के,
तोड़े मरोड़े वो कागज़ की कश्ती को,
फिर बहायें मिल कर सावन की नाली में,
चल आ, संग बैठ,
फिर खेले साथ मिल कर खेल वो नवयौवन के,
महसूस करने छुवन को,
थोड़े सकुचाये, थोड़े शर्मायें से,
अँधेरे में छुप छुपा कर,
मिले अकेले डरते हुए बालकनी में,
तू चलना आगे, मैं चलूँ बन के साया तेरे पीछे,
कभी तुझे कभी तेरी परछाई बनने की  कोशिश मे,
चल आ संग बैठ,
फिर खेले साथ मिल कर खेल वो तेरे मेरे आँगन के,
कभी फूलों की पखुडियाँ, तो कभी उंगलियाँ, ईशारों में तोडना,
कभी बेमन तो कभी बेचन सा बनकर तुझसे उलझना,
कभी तुझमें सितारों को तो कभी सितारों में तुझे टटोलना,
कभी तेरी ओढ़नी से सितारें तोड़ कर तेरी बिंदी बनाना,
चल आ, संग बैठ,
फिर खेले साथ मिल कर खेल वो तेरे मेरे मन के.........    

शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

1947-एक दर्द....

मैं नही था वहाँ,
मैं दर्शक भी नही ना श्रोता ही था,
जब प्लेटफार्म पर माँ, बहन और,
अपने बिछडों को ढूंढता,
रोता फिर रहा था वो,
हर तरफ रक्त,
छिन्न भिन्न अंग,
शिथिल पड़े मांस के लोथड़े,
चीख और पुकार,
अंधेरों में टटोलता अपना संसार,
मैं नही था वहाँ,
जब रोता फिर रहा था वो,
फफक, सिसक रहा था वो,
इतना तो बिलबिलाया तो गोद में भी ना था,
जितना वो भूख दे रही है दर्द,
इतना डरा पहले कभी ना था वो,
जितना अँधेरे में रक्त पिपासु श्वान बने है वजह,
कैसी दुर्गन्ध है फिज़ा में,
ऐसी दुर्गन्ध खेत जले तो भी ना थे..
कहाँ जाएगा,
क्या रक्त से प्यास बुझाएगा,
कैसे ज़ख्म भर पायेगा,
कैसे पिंड की याद बिसरायेगा,
अब कौन उसे रोटी खिलायेगा,
छाछ और दही की खुश्बू वो कहाँ से पायेगा...
....मैं नही था वहाँ,
क्यूँ नही था वहाँ,
पर ज़ख्म अब भी भरे नही है,
मैं दर्शक भी नही ना श्रोता ही था,
मैं क्यूँ नही था..............

एक अरसा गुजर गया..........

कुल दो बरस ही तो गुजरे है,
पर लगता है,
की एक अरसा गुजर गया,
तेरी छुअन का एहसास अब तक महक रहा है,
कल तेरी तस्वीर देखी,
अनजाने में ही दर्द के दरिया में,
डूबने उभरने लगे हम,
नही मालूम तेरे सफर के बारे में,
तू कितना बदल गया है,
ये भी एहसास नही है मुझे,
पर मेरा सफर तो बस तुझसे ही था,
मेरा भ्रम, संयम, खुशी और गम,
सब कुछ तुझसे ही तो था,
रूबरू होने के मौके नही है,
मेरे पास अब,
तेरी तस्वीर ही है अब,
तेरा पता नही है,
किस शहर, किस गली में,
जाने कौन से डगर,
कहाँ खोजूँ तुझे,
किससे पूछूँ पता तेरा,
कोई तुझे वैरागन,
कोई जोगन,
कोई तुझे मीरा कहता है,
फकीरों की टोली में,
या मंदिरों में देखता है,
मुझे पता है तेरी तलाश क्या है,
पर तू तो मेरी तलाश है,
की एक अरसा गुजर गया,
तू देव को आज भी याद है................

मंगलवार, 5 अगस्त 2014

वो जबाब-हर बार अनेक बार

जिंदगी में कुछ ऐसे भी पल आते है,
जब अपने ही हमसे दूर हो जाते है,
पास में उनकी यादें भी नही होती,
और वो लौटकर यादों में भी नही आते है।।
"ये यादें भी अजीब होती है ना, जब आती है तो आंधी तूफ़ान बन कर और एक झटके में ही आपको कितना पीछे धकेल देती है।
आप सोचते है मैं क्या था और क्यूँ था मैंने यें क्यूँ किया आखिर क्या हो गया था मुझे की मैंने ये गलती की?
हर किसी की जिंदगी में ऐसा मोड़ आता है जब वो कुछ पाने की चाह में जुनून की हद तक चला जाता है।
जुनून........एक ऐसा शब्द जिसे सुनने में ही आपके अन्दर ऊर्जा का संचार होने लगता है। उसके इसके हर किसी के अन्दर होता है ऐसा।
उसे भी कुछ महसूस हो रहा था जिसे वो समझने की कोशिश कर रहा था। वो....आखिर कौन था जिसे वो का संबोधन दे रहे है, कोई तो आकार होगा कोई तो स्वरूप होगा?
वो....हमारे आपके भीतर शामिल एक अजीब सी ऊर्जा है जो हमारे भीतर याद का संचार करती है।
कुछ ऐसी ही अनकही सी बातें है जो कभी कभी हम आप सोचते है वो सोच का समाधान, उस सोच को रूप देना आवश्यक है।।

गुरुवार, 1 मार्च 2012

तीन रंगों का कफ़न


मेरे सीने पे छुरियाँ चल जाती है,
जब भी किसी के शहीद होने की खबर आती है,
कतरा कतरा अश्क की जगह खून बहता है,
अब रोता हुआ मेरा ह्रदय कहता है,
कौन दे इन आहो का हिसाब,
की हर दिन ये देश एक वीर योद्धा खोता है,
छल प्रपंच और बेईमानी का बोलबाला है,
हर वीर के ह्रदय में प्रज्जवलित ज्वाला है,
पर वो बंधनों में लिपटा है कफ़न में लिपटा है,
कौन दे बेबसियों का हिसाब,
की हर दिन ये देश एक वीर खोता है,
अब रोता हुआ मेरा ह्रदय कहता है,
तीन रंगों का कफ़न भी बेरंग लगता है,
जब पार्थिव शरीर इसमें लिपटा होता है,
की हर दिन ये देश एक वीर खोता है,
माँ जननी का एक सपूत खोता है,
जागो गहरी निद्रा में सोने वालो,
की कुम्भ्करनी नींद फिर नसीब ना होगी,
जब वो ना होंगे हमें खुशियाँ नसीब ना होगी,
ना होली के रंग होंगे ना देहरी पर दिए जलेंगे,
कौन दे माँ के अश्कों का हिसाब,
की हर दिन ये देश एक वीर खोता है,
अब रोता हुआ वृद्ध हिमालय कहता है.
तीन रंगों का कफ़न भी बेरंग लगता है,
की हर दिन ये देश एक वीर खोता है......

रविवार, 27 नवंबर 2011

मैं तन्हा ही सही


मैं तन्हा ही सही पर ऐ जाने हसीं,
तू पास आने की कोशिश ना कर,
ये दिल टुटा ही सही पर ऐ जाने हसीं,
तू दिल बहलाने की कोशिश ना कर,
माना लाख कांटे है मेरी राहों में,
तू कलियाँ बिछाने को कोशिश ना कर,
खिली चांदनी पूनम की रात में,
तू मेरा दिल जलाने की कोशिश ना कर,
बहुत बेरहम हूँ, जंगली सा हूँ मैं,
तू मुझे इंसान बनाने की कोशिश ना कर,
माना रहमदिल सही तू इस ज़माने में,
तू मुझ पर रहम दिखाने की कोशिश ना कर,
ज़ख्म हज़ार लगे है वफ़ा में इस जिगर पे,
तू ज़ख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश ना कर,
मैं तन्हा ही सही पर ऐ जाने हसीं,
तू मेरी जिंदगी में आने कोशिश ना कर............

दास्ताँ ऐ परवाना


शमां ने पूछा परवाने से तू क्यूँ जल रहा है...
परवाना बोला जादू ये तेरे इश्क का है..
शमां बोली ग़लतफ़हमी है, तेरे लिए नही है प्यार मेरा...
उदास परवाने ने पूछा बता भला कौन है प्यार तेरा...
शमां बोली जलाना मेरी फितरत और अदा है...
मरना परवाने तेरी मजबूरी और सजा है....
खता तेरी नहीं, परवाने मेरे रूप का असर है...
तू अकेला नही मेरे आशिकों में...
पीछे जान देने को जहान है...
उदास परवाने ने कहा, सच्चा प्यार बेवफा का इलज़ाम नही देता..
तभी तो मरकर भी वो अपने सच्चे प्यार का एहसास नही देता...

शुक्रवार, 6 मई 2011

अपनी पहचान


तोड़ दो सारे बंधनों को,
रस्मो को रिवाजों को,
बदल दो दिशा अपनी,
बदल दो पहचान अपनी,
अवधारणा को बदलो......
"चाह क्यूँ है स्वर्ण महल की,
इस चाह को बदलो,
बदल दो पहचान अपनी,
अवधारणा को बदलो.....
पग पग पर कांटे बिछे हो तो क्या,
आसमान में तेज निगाहे हो तो क्या,
स्वछन्द विचरण को अपनाओ,
बदल दो पहचान अपनी,
अवधारणा को बदलो.....
धो डालो हाथों की मेहँदी अपनी,
उन्मुक्त हो विचरो इस धरा पर,
अपनी पहचान बदलो,
तोड़ दो सारे बंधनों को,
रस्मो को रिवाजों को,
प्रथाओं को बदलो,
बदल दो दशा अपनी,
अपनी पहचान बदलो.................

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

कुछ बातें..................

रात की ख़ामोशी में जब यादें प्रबल होती है,
कलेजा जलाते है,
तन्हाई को धुंए में उड़ाते है,
तिनका तिनका खुद को भुलाते है,
उनकी यादों में खुद को मिटाते है....
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उन्हें भूल कर भी ना भूल पाए हम,
हर दरगाह पर सर झुकाए हम,
किसी भी हद से गुजर जाए हम,
एक बार तो उन्हें दुआओं में पाए हम....
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हर किसी को दर्द है इस महफ़िल में,
हर किसी को तलाश है दवा की,
जाने किसकी आँखों से छलक जाए जाम,
जाने किसके अधरों पर आये हमारा नाम......
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जंगल से धुआं उठा सिगार का और अफवाह फ़ैल गयी भयंकर आग है ......
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तेरी यादों के सहारे मेरी जिंदगी...
तेरी जिंदगी में मैं कही नहीं....
क्या सिला मिला मुझे प्यार का....
बस गम खुशी कही नहीं..........................
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बड़ी मुश्किल से इश्क के नर्क से निकल पाया हूँ मैं,
बड़ी मुश्किल से उस बेवफा को भूल पाया हूँ मैं,
एक अँधेरा था हर ओर मेरे,
बड़ी मुश्किल से अँधेरे से निकल पाया हूँ मैं,
राहे रोशन होने लगी है मेरी,
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उसकी यादों ने कुछ तो किया है,
उसकी यादो ने कुछ तो दिया है,
नींदों में ख्वाब है उसके,
एक नया ख्वाब दिया है.....
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फासलो ने सिखाया है जीना हमें दूरियां अब तडपाती नहीं,
वो मिले ना मिले कोई गम नहीं.....
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Mind relation is greater than love relation on this earth...........
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what is love try to understand first before falling in love......after falling in love u can't reveal ur mistake and can't regret..
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बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

ब्रेकिंग न्यूज़

वैधानिक चेतावनी - यह व्यंग नही कहानी है l
नमस्कार दर्शको आपका स्वागत है हमारे न्यूज़ चैनल सिटी न्यूज़ पर I जहाँ हम आपको दिखाते है देश, दुनिया, खेल और मनोरंजन की बड़ी खबरें l
मैं हूँ आपका एंकर भभूत मिश्र और आप देख रहे है हमारी विशेष प्रस्तुति सनसनी शहर l
दर्शको अभी आप अपने टीवी स्क्रीन पर देख रहे है सनसनीखेज ब्रेकिंग न्यूज़ I ये न्यूज़ छन कर आ रही है हरामगंज में स्थित मिठाईवाला रेस्तरां के सामने से......
तो दिल थाम कर बैठिये ये खबर आपकी धड़कने बढा देगी, आपकी सांसे रोक देगी ( एंकर ने डराने वाले अंदाज़ में कहा ) l हम आपको दिखाने जा रहे है एक लड़की का चीरहरण जो सरेआम हरामगंज के मुख्य सड़क पर हो रहा है और इसे अंजाम दे रहे है तो बदमाश से दिखने वालें युवक और इस घटना को देखने के लिए सड़क पर काफी भीड़ जमा है l
तो आइये चलते है हम आपको लेकर चलते है इस घटना की पूरी जानकारी देने के लिए अपने संवाददाता के पास जो अभी भी उस भारी भीड़ में बड़ी बहादुरी के साथ इस समय घटनास्थल पर मौजूद है और आप तक पल पल की खबर और सजीव विडियो भेज रहे है l
भभूत संवाददाता से - लाल अभी वहाँ के क्या हालात है ? अभी तक वहाँ पुलिस पहुंची है या नहीं ! और आम जनता की क्या प्रतिक्रिया है इस घटना पर l जनता में आक्रोश है या नहीं ?
संवाददाता - देखिये सर आम जनता बहुत ही उतेजित और रोमांचित है लेकिन हालात अभी नियंत्रण में है l मैंने भीड़ की राय जानने की कोशिश की है, खैर मैं इस बारे में बाद में बताऊँगा पहले पूरी घटना विस्तार से बताता हूँ l
जैसा की आप देख रहे है अभी वो बदमाश जो नशे में धुत हैं उस लड़की के कपडे फाड़ने की कोशिश कर रहे है l
रही बात पुलिस की तो यहाँ से निकटतम पुलिस थाना महज़ १ किलोमीटर पर स्थित है लेकिन पुलिस अभी भी यहाँ नहीं पहुंची है l
भभूत - लाल आपको क्या लगता है की उस लड़की के साथ बलात्कार होने की कोई संभावना है ( एंकर मुस्कुराते हुए ) या ये भी
राखी सावंत की तरह पब्लिसिटी कर रही है l अभी तक ये पता चला या नहीं की इस घटना के पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है l क्या उन गुंडों के पास हथियार वगैरह भी है ?
संवाददाता- सर, फिलहाल तो बलात्कार की कोई संभावना नहीं है क्योंकि वो दोनों नशे में धुत है....... l जैसे की अपुष्ट खबर छन के आ रही है की पीड़ित लड़की कॉलगर्ल है और इन सबके बीच पैसे के बंटवारे को लेकर झगडा हो रहा है और रही बात हथियार की तो लगता है की उन दोनों के पास पाकिस्तान का बना हुआ पिस्टल है जो उनके जेब से बाहर झाँक रहा है l
भभूत- धन्यवाद लाल, हम अभी आपके पास दुबारा लौटेंगे......
दर्शको आप देख रहे है हरामगंज एक लड़की का चीरहरण l आप हमारे साथ बने रहिये, हम अभी हाज़िर होते है इक छोटे से ब्रेक के बाद l
आप इस चीरहरण की सनसनीखेज विडियो का लाइव प्रसारण देख सकते है सिर्फ सिर्फ हमारे चैनल पर l
ब्रेक के बाद ----
भभूत - ब्रेक के बाद आपका स्वागत है और आप देख रहे है हरामगंज की मुख्या सड़क पर एक कॉलगर्ल के साथ हो रहे चीरहरण ( इस बार समाचार प्रस्तोता का स्वर बदल गया ) की सनसनीखेज तस्वीरें सिर्फ और सिर्फ हमारे चैनल पर l
तो चलिए हम वापस ले कर चलते है आपने संवाददाता के पास जो अभी ही बड़ी ही बहादुरी के साथ घटनास्थल पर मौजूद है l
भभूत लाल से - लाल अभी वहाँ के हालात कैसे है ? क्या वहाँ खड़ी भीड़ में से कोई भी इस बारें में कुछ बोलने के लिए तैयार है ?
संवाददाता- देखिये सर कहानी तो साधारण है लेकिन इस बारे में और जानने के लिए हम बात करते है यहाँ के स्थानीय निवासी से.l
सर क्या आप बताना चाहेंगे की इन सब के पीछे किसका हाथ है " संवाददाता ने वहाँ खड़े एक प्रत्यक्षदर्शी से पूछा l
क्या यार तुम मीडिया वाले भी न पीछे पड़ जाते हो चुपचाप नज़ारा देखो, पूरी जिन्दगी देखने को नहीं मिलेगी l देख तुने जो विडियो बनाया है न उसकी एक प्रति मुझे दे दे MMS बोल कर पैसा कमा लेंगे ( उस आदमी ने फुसफुसाते हुए कहा )
दर्शको आप देख सकते है की यहाँ का नज़ारा कैसा है यहाँ खड़े सारे लोग उत्साहित और आनंदित नज़र आ रहे है, क्या बूढे क्या बच्चे l
कैमरामैन रायेद के साथ मैं लाल श्री सिटी न्यूज़ के लिए l
भभूत - धन्यवाद लाल,
तो ये थे हमारे संवाददाता जो आपको पल पल की खबर दे रहे थे
दर्शको इस बिषय पर चर्चा करने के लिए अभी थोडी देर में स्टूडियो में मौजूद होंगी मशहूर मानवाधिकारी बरका नन्द, समाजशास्त्री रेयान शाह और महिला संगठन की प्रदेशअध्यक्ष श्रीमती नीना दास्वा l इसके साथ ही फोनलाइन पर इस बिषय पर चर्चा करने के लिए मौजूद होंगे हरामगंज के उपपुलिस निरीक्षक पांडवा l
इस बिषय पर हम थोडी देर में चर्चा करेंगे, फिलहाल समय हो रहा है एक छोटे से ब्रेक का l अगर आप मौजूद मेहमानों से कोई भी सवाल पूछना चाहते है हमें मैसेज भेज सकते है l
ब्रेक के बाद -
भभूत- दर्शको ब्रेक के बाद आप सबका स्वागत है हमारे चैनल पर, हरामगंज में हो रही घटना पर बात करने के लिए मौजूद मेहमानों का भी स्वागत है l
सर ये घटना जो हरामगंज में घटी है उस घटनास्थल से पुलिस चौकी कुछ ही दूर है फिर भी आपकी पुलिस टीम अभी तक नहीं पहुंची है, क्या आप इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे l ( भभूत ने पांडवा से कहा )
देखिये हमारे पास खबर थी की शहर में बम फूटने वाले है तो हमारी पूरी फोर्स बम ढूंढने में लगी है l वैसे भी वो एक कॉलगर्ल है और ये उसका रोज का काम है l ( पांडवा ने कहा )
तो आपके कहने का ये मतलब है की लड़की अगर कॉलगर्ल हो तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के पास नहीं है l
पांडवा सर आपका बयान बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है, हम आपके खिलाफ कोर्ट में जायेंगे ( महिला संगठन की अध्यक्ष ने कहा )
धीरे धीरे चारों मेहमानों और समाचार प्रस्तोता के मिश्रित स्वर बिना नियंत्रण के बढ़ता रहा और झगडे का स्वरुप लेने लगा l
उधर संवाददाता भी बेवजह चिल्लाये जा रहा था l
विडियो अभी भी टीवी स्क्रीन पर आ रहा था जिसमे प्रसारित हो रहा था की कैसे खडी भीड़ उन गुंडों का साथ दे रही थी, लड़की ( मासूम, शायद वेश्या ना हो ) के निजी अंगो से छेड़छाड़ करने में l
"मम्मी ईई ईईई केबल वाले को बोलो की ये बकवास समाचार चैनल को बंद कर दे, हमे नहीं चाहिए l सोहम ने कहा जो काफी देर से उस बकवास को झेल रहा था l
फिर उसने केबल वाले को फोन लगाया और कहा " केबल वाले भैया ये चैनल को ब्लाक कर दो हमारे घर पर नहीं चलना चाहिए.
केबल वाले ने जबाब दिया- सोहम बेटे तुमने आज का अखबार नहीं पढ़ा क्या, हमारी न्यायपालिका ने आदेश जारी किया है की अगर आप कोई भी चैनल नहीं देखना चाहते है तो रिमोट है ना आपके हाथ में l
वैसे भी इस चैनल की बड़ी मांग है लोगो में क्योकि यही चैनल है जो सबसे ज्यादा दिखता है गरमा गरम...........
ब्रेकिंग न्यूज़

गुरुवार, 24 सितंबर 2009

लाश

सड़क के बीचो बीच एक लाश पड़ी है, वो लाश एक युवती की है जो कमसिन थी मरने के पहले, लेकिन वो सड़क पर पड़ी इक लावारिश लाश है I जिसके बदन पर चंद कपड़े चिथडों के रूप में आने जाने वालों पर हँस रहे है I
इस मुर्दा लाश को देखने के लिए सड़क पर भीड़ जमा थी वो भी लाशों की........ जिन्दा लाशों की !
सड़क पर जमा भीड़ की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी शानदार गाड़ियों में सुकून से बैठे हुए इलीट क्लास से लोगो को होती है जो बैठे तो एसी में होतें है लेकिन बार बार अपने चेहरे पर उभर कर आने वाले पसीने की बूंदों को पोछतें है I
ऐसे ही एक साहब भीड़ की वजह से परेशान दिखाई दे रहे है अपनी बेशकीमती कार के अंदर बेचैन से बैठे है I ये साहब इस इलाके में अपनी शानो शौकत और अपने शानदार बंगले की वजह से जाने जाते है और हाँ कभी कभी ये दान पुण्य भी कर लेते है,....
सेठ जी की चिंता बढती ही जा रही है, इन्हें अपने घर पहुँचने की जल्दी है पर सड़क पर जाम लगा हुआ है और उस जाम की वजह है वो लाश और उस लाश को देखने वालें जिन्दा लाशों की भीड़....
"सेठ जी झल्लाते हुए अपने ड्राईवर से" ड्राईवर जरा बाहर किकल कर देखो तो यहाँ इतनी भीड़ क्यूँ लगी है ( वैसे तो ड्राईवर सेठ जी से उम्र में दोगुने बड़े है लेकिन रसूख तो रसूख होता है भाई )
थोडी देर में ड्राईवर जब लौट कर आया तो काफी सहमा हुआ था I
डरते डरते उसने मालिक से कहा की साहब इक निवेदन है की आप एक बार उस लाश को देख लीजिये शायद कुछ याद आ जाये I
कुछ याद आ जाये से तुम्हारा क्या मतलब है ( सेठ ने झल्लाते हुए कहा )
सर एक बार कृपया कर आप देख लें ( ड्राईवर ने फिर निवेदन किया )
ड्राईवर के बार बार आग्रह करने के बाद सेठ ने सोचा की कुछ तो बात है, इक बार चल कर देखना चाहिए.....
खैर इस बार सेठ ने मना नहीं किया I
लेकिन जिस तेजी से वो गए थे उससे दोगुनी तेजी से हाँफते हुए वो वापस अपनी कार में दाखिल हो गये और बिना सांस लिए चिल्लाते हुए अपने ड्राईवर से बोले "तुमने उसे देखा..... मैं मैं..... इसके आगे उनके हलक से आवाज नहीं निकली I
ड्राईवर ने कहा "साहब ये वही लड़की है जो उस रात बारिश से बचने के लिए आपके बंगले में आई थी और आपने उसकी मजबूरी......... ( ड्राईवर ने चुप्पी साध ली )
एक ठंडी सांस लेने के बाद सेठ ने पूछा "आखिर इसकी मौत हुई तो कैसे ?
ड्राईवर ने कहा "साहब उस छोरी को एड्स की बिमारी थी उसकी रिपोर्ट उसके पास ही सड़क पर पड़ी है I चारों तरफ से दुत्कारे जाने के बाद से ही बेचारी रास्तों पर मारी मारी फिर रही थी I ( ड्राईवर की आँखों में आंसू आ गये )
इतना सुनते ही सेठ जी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया...( ड्राईवर अपनी धुन में बोले जा रहा था उसे खबर भी ना थी की....)
इक लाश सड़क के बीचो बीच पड़ी है उसे देखने के लिए लाशों की भीड़ भी खड़ी है लेकिन सड़क पर खड़ी शानदार कार के अंदर भी एक लाश पड़ी है, "सेठ जी की लाश" I ( ड्राईवर अभी भी बोले जा रहा है जैसे उसे कोई पुरस्कार मिलने वाला हो )

सोमवार, 7 सितंबर 2009

छाई तन्हाई है

आज फिर छाई तन्हाई है,
आज फिर याद आपकी आई है,
आज फिर हम उदास है,
आज फिर बुझे बुझे से प्यास है,
आज फिर आपकी बातें याद आती है,
आज फिर तन्हाई तडपाती है,
आज फिर आपको याद किया है,
आज फिर रब से फरियाद किया है,
आज फिर आप ख्वाबों में आये है,
आज फिर आपने अरमां जगाये है,
आज फिर तन्हाइयों के तूफ़ान आये है,
आज फिर ख्वाबून के आशियाँ बिखरे है,
आज फिर काश आप पास होतें,
आज फिर काश आपकी याद होती,
आज फिर जरुरत आपके दर्श की है,
आज फिर आपकी आवाज सुननी है,
आज फिर आपसे बातें करनी है,
आज फिर आपके साथ चलने की ख्वाहिश है,
आज फिर आपके साथ कुछ पल पल गुजारने है,
आज फिर जिन्दगी जी लेने की जरुरत है,
आज फिर कुछ पलों के लिए ही......जरुरत है.........

जरूरत ही क्या है

इस राह में कांटे इतने बिछे है, फूलों की जरूरत ही क्या है,
इस दिल में नश्तर इतने चुभें है, मरहम की जरुरत क्या ही है,
जब इक कली बेताब होती है, फूल बनने की राह पर चल देती है,
कितने कांटे कली की बिछे है राहों में, पूछने की जरुरत ही क्या है,
क्यूँ खामोश बैठा है आज ये नादान चचल भौंरा डाली पर,
खुद पर इतराती शोख कली को पूछने की जरुरत ही क्या है,
खामोश है दरिया, खामोश है पानी, ये अंबर, ये जमीं खामोश है,
खामोश है नज़ारें क्यों, किसी को पूछने की जरुरत ही क्या है,
गुजरता पल, आती निशा, डूबता सूरज, खामोश ये शमां क्यों है,
चाँद बुझा, चांदनी ढली क्यूँ , ये समझने की जरुरत ही क्या है,
मंद मंद हवा, ये गर्म दोपहर, क्यूँ तपता है ये सूरज,
क्यों जलता है ये परवाना, शमां को पूछने की जरुरत ही क्या है,
वो जोड़े हंसों के रागनियाँ गा रहे, जल क्रीडा करते हुए दूर जा रहे,
क्या वो बिछुड़ जायेंगे, विधाता से पूछने की जरुरत ही क्या है...

ना जाने

ना जाने कौन सा था वो पल,
जिस पल में तुम गये थे,
रौशनी से रोशन कर राहें मेरी,
अंधेरों में मुझे धकेल गये थे,
ना जाने कौन सा था वो पल,
जिस पल में तुम गम हो गये थे........
अब तो सहर भी शब से है भारी,
अब तो हर पल रहती है बेकरारी,
ना जाने कौन सा था वो लम्हा,
जिस पल में तुम चले गये थे....
खुले आँखे बोझिल पलकें,
रुत भी अब ग़मगीन है,
ना जाने कैसी थी वो रुत,
जिस रुत में गुमशुदा हो गये थे,
ना जाने......................

मैं लड़की और वो लड़का है

नयन अलग नहीं, रूप एक सा है,
सृजन है दोनों प्रकृति के,
अंतर क्या मैं लड़की और वो लड़का है,
मैं निरक्षर क्यूँ और वो पढता है,
अंतर क्या..........
बचपन साथ गुजरता, इक खून का रिश्ता बनता है,
आधार है दोनों इस जहां के,
जगत जननी के साथ ये दुर्व्यवहार क्यूँ है,
अंतर क्या....
नींव कमजोर हो गर तो शीर्ष कमजोर है,
जड़े गहरी है हमारी, हमें आगाज़ दो
निरक्षरता का अँधेरा भयावह है,
हमें ज्ञान का प्रकाश दो,
ग़लतफ़हमी है ये की,
मैं लड़की और वो लड़का है......

आँसू की बूंदे

पग पग पर बिखरी आँसू की बूंदे,
तेजाब बन जलायेगी हमें,
गर अनदेखा किया इन्हें,
कही सुकून ना लेने देंगी हमें,
उन्मुक्त वातावरण की बुलबुल,
ना गा सकेगी कैद में,
फिर कहाँ सुमधुर संगीत सुनाएगी हमें,
पग पग पर बिखरी.....
अकेलेपन का अहसास दिलायेंगी हमे,
जहन्नुम की ज्वाला बन जलायेगी हमें,
हरियाली बिन उजाड़ उपवन,
नारी बिन सूना है ये जग,
जब वो ना रहेंगे इस दुनिया में,
पग पग पर बिखरी.....
इक स्मृति बन रुलायेंगी हमें,
तेजाब बन जलायेगी हमें,
पग पग पर बिखरी.....

रविवार, 6 सितंबर 2009

तोहर गईया

बाबा तोहरे दुआरिये पे रहत रहुए एगो गईया रे,
कवन खूंटा बाँध दिहनी बाबा आपन गईया के,
बाबा तोहरे दुआरिये.....
गईया मांगले का बस दू गो रोटी,
अउर छोट मांगले से झोपड़ी,
ठौर ठिकाना दिहनी बाबा एगो कसईया के,
बाबा तोहरे दुआरिये.....
मंगनी बाबा बस तहार आसरा,
बच्च्वे से मिलल न माई के अंचरा,
बाबा जी ई का कईनी भेज देहनी बजरिया में.
बाबा तोहरे दुआरिये.....
अंसुओ ना निकले आँखवा सुजाइल बा,
सिसकी बंद बा करेजा में तीरवा बेधाइल बा,
बाबा जी कवन गलती कईलख गईय्या हो,
तकदीर में लिख देहल संग कसईया के,
बाबा तोहरे दुआरिये पे रहत रहुए एगो गईया रे,
कवन खूंटा बाँध दिहनी बाबा आपन गईया के..........

तोहर गईया

बाबा तोहरे दुआरिये पे रहत रहुए एगो गईया रे,
कवन खूंटा बाँध दिहनी बाबा आपन गईया के,
बाबा तोहरे दुआरिये.....
गईया मांगले का बस दू गो रोटी,
अउर छोट मांगले से झोपड़ी,
ठौर ठिकाना दिहनी बाबा एगो कसईया के,
बाबा तोहरे दुआरिये.....
मंगनी बाबा बस तहार आसरा,
बच्च्वे से मिलल न माई के अंचरा,
बाबा जी ई का कईनी भेज देहनी बजरिया में.
बाबा तोहरे दुआरिये.....
अंसुओ ना निकले आँखवा सुजाइल बा,
सिसकी बंद बा करेजा में तीरवा बेधाइल बा,
बाबा जी कवन गलती कईलख गईय्या हो,
तकदीर में लिख देहल संग कसईया के,
बाबा तोहरे दुआरिये पे रहत रहुए एगो गईया रे,
कवन खूंटा बाँध दिहनी बाबा आपन गईया के..........

गुरुवार, 3 सितंबर 2009

कभी फुर्सत मिले

कभी फुर्सत मिले तो सोचना वो कौन था,
देकर तुम्हे जहां जाने कहाँ गया,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना
तेरे आंसू जिसे चुभते थे नश्तर की तरह,
कभी पल मिले तो सोचना...
तेरी इक आहट उसकी चैन बन जाती थी,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना..
बन के तेरा हमनवां रहता था तेरे आस पास.
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
क्या था वो,
जो बन कर दोस्त तुम्हारा, न बन सका जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
कौन था वो,
जो साया बना तुम्हारा, न बन सका जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
कैसा था वो,
जो तुम्हे याद कर के भी, न बस सका याद जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
क्या चाहता था वो,
जो तेरा इंतजार करता, तेरे रस्ते पे, न बन सका तेरा जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना.........