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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

एक अरसा गुजर गया..........

कुल दो बरस ही तो गुजरे है,
पर लगता है,
की एक अरसा गुजर गया,
तेरी छुअन का एहसास अब तक महक रहा है,
कल तेरी तस्वीर देखी,
अनजाने में ही दर्द के दरिया में,
डूबने उभरने लगे हम,
नही मालूम तेरे सफर के बारे में,
तू कितना बदल गया है,
ये भी एहसास नही है मुझे,
पर मेरा सफर तो बस तुझसे ही था,
मेरा भ्रम, संयम, खुशी और गम,
सब कुछ तुझसे ही तो था,
रूबरू होने के मौके नही है,
मेरे पास अब,
तेरी तस्वीर ही है अब,
तेरा पता नही है,
किस शहर, किस गली में,
जाने कौन से डगर,
कहाँ खोजूँ तुझे,
किससे पूछूँ पता तेरा,
कोई तुझे वैरागन,
कोई जोगन,
कोई तुझे मीरा कहता है,
फकीरों की टोली में,
या मंदिरों में देखता है,
मुझे पता है तेरी तलाश क्या है,
पर तू तो मेरी तलाश है,
की एक अरसा गुजर गया,
तू देव को आज भी याद है................

सोमवार, 7 सितंबर 2009

मैं लड़की और वो लड़का है

नयन अलग नहीं, रूप एक सा है,
सृजन है दोनों प्रकृति के,
अंतर क्या मैं लड़की और वो लड़का है,
मैं निरक्षर क्यूँ और वो पढता है,
अंतर क्या..........
बचपन साथ गुजरता, इक खून का रिश्ता बनता है,
आधार है दोनों इस जहां के,
जगत जननी के साथ ये दुर्व्यवहार क्यूँ है,
अंतर क्या....
नींव कमजोर हो गर तो शीर्ष कमजोर है,
जड़े गहरी है हमारी, हमें आगाज़ दो
निरक्षरता का अँधेरा भयावह है,
हमें ज्ञान का प्रकाश दो,
ग़लतफ़हमी है ये की,
मैं लड़की और वो लड़का है......