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रविवार, 27 नवंबर 2011

दास्ताँ ऐ परवाना


शमां ने पूछा परवाने से तू क्यूँ जल रहा है...
परवाना बोला जादू ये तेरे इश्क का है..
शमां बोली ग़लतफ़हमी है, तेरे लिए नही है प्यार मेरा...
उदास परवाने ने पूछा बता भला कौन है प्यार तेरा...
शमां बोली जलाना मेरी फितरत और अदा है...
मरना परवाने तेरी मजबूरी और सजा है....
खता तेरी नहीं, परवाने मेरे रूप का असर है...
तू अकेला नही मेरे आशिकों में...
पीछे जान देने को जहान है...
उदास परवाने ने कहा, सच्चा प्यार बेवफा का इलज़ाम नही देता..
तभी तो मरकर भी वो अपने सच्चे प्यार का एहसास नही देता...