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मंगलवार, 5 अगस्त 2014

वो जबाब-हर बार अनेक बार

जिंदगी में कुछ ऐसे भी पल आते है,
जब अपने ही हमसे दूर हो जाते है,
पास में उनकी यादें भी नही होती,
और वो लौटकर यादों में भी नही आते है।।
"ये यादें भी अजीब होती है ना, जब आती है तो आंधी तूफ़ान बन कर और एक झटके में ही आपको कितना पीछे धकेल देती है।
आप सोचते है मैं क्या था और क्यूँ था मैंने यें क्यूँ किया आखिर क्या हो गया था मुझे की मैंने ये गलती की?
हर किसी की जिंदगी में ऐसा मोड़ आता है जब वो कुछ पाने की चाह में जुनून की हद तक चला जाता है।
जुनून........एक ऐसा शब्द जिसे सुनने में ही आपके अन्दर ऊर्जा का संचार होने लगता है। उसके इसके हर किसी के अन्दर होता है ऐसा।
उसे भी कुछ महसूस हो रहा था जिसे वो समझने की कोशिश कर रहा था। वो....आखिर कौन था जिसे वो का संबोधन दे रहे है, कोई तो आकार होगा कोई तो स्वरूप होगा?
वो....हमारे आपके भीतर शामिल एक अजीब सी ऊर्जा है जो हमारे भीतर याद का संचार करती है।
कुछ ऐसी ही अनकही सी बातें है जो कभी कभी हम आप सोचते है वो सोच का समाधान, उस सोच को रूप देना आवश्यक है।।

सोमवार, 7 सितंबर 2009

ना जाने

ना जाने कौन सा था वो पल,
जिस पल में तुम गये थे,
रौशनी से रोशन कर राहें मेरी,
अंधेरों में मुझे धकेल गये थे,
ना जाने कौन सा था वो पल,
जिस पल में तुम गम हो गये थे........
अब तो सहर भी शब से है भारी,
अब तो हर पल रहती है बेकरारी,
ना जाने कौन सा था वो लम्हा,
जिस पल में तुम चले गये थे....
खुले आँखे बोझिल पलकें,
रुत भी अब ग़मगीन है,
ना जाने कैसी थी वो रुत,
जिस रुत में गुमशुदा हो गये थे,
ना जाने......................

गुरुवार, 3 सितंबर 2009

कभी फुर्सत मिले

कभी फुर्सत मिले तो सोचना वो कौन था,
देकर तुम्हे जहां जाने कहाँ गया,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना
तेरे आंसू जिसे चुभते थे नश्तर की तरह,
कभी पल मिले तो सोचना...
तेरी इक आहट उसकी चैन बन जाती थी,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना..
बन के तेरा हमनवां रहता था तेरे आस पास.
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
क्या था वो,
जो बन कर दोस्त तुम्हारा, न बन सका जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
कौन था वो,
जो साया बना तुम्हारा, न बन सका जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
कैसा था वो,
जो तुम्हे याद कर के भी, न बस सका याद जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना,
क्या चाहता था वो,
जो तेरा इंतजार करता, तेरे रस्ते पे, न बन सका तेरा जो,
कभी फुर्सत मिले तो सोचना.........