शनिवार, 20 जून 2009

कन्हईया......तोहरी मईया

कन्हईया रोवत होवेगी दुआरे तोहरी मईया,
कन्हईया रोवत.....................
नयन द्वय अश्रुं के दर बने होंगे,
अचरा में अश्रुं बटोरत होवेगी तोहरी मईया,
कन्हईया रोवत.....................
सुने लागत होंगे बाग़ सारे, कोयलिया भी न होगी,
अंगना में.. नीर बहावत होवेगी तोहरी गईया,
कन्हईया रोवत......................
अब न हिलोर मारेगी जमुना मईया,
कईसे पुकारेगी तोहे कदम्ब की छईया,
कन्हईया रोवत.....................
प्रेम अभागन राधा रानी, प्रेम बैरागन मीरा दीवानी,
राह तकत होवेगी फैलाकर अपनी बईयाँ,
कन्हईया रोवत.....................
गोकुल छुट गयो, दर से दूर भयो,
कईसे लेगी मईया तोहरी बलईया,
कन्हईया रोवत होवेगी दुआरे तोहरी मईया,

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