शनिवार, 20 जून 2009

चंद लम्हें

"चंद लम्हों में मिलती नही यहाँ किसी को खुशियाँ
चंद लम्हों में छीन जाती है किसी से यहाँ दुनिया,
चंद लम्हों का ये खेल भी अज़ब होता है,
चंद लम्हों में कोई पता कोई खोता है,
चंद लम्हों में मिलती .........
चंद लम्हों में रांझा बिछडा हीर से,
चंद लम्हों में मजनूँ हारा तकदीर से,
चंद लम्हों में फ़रहाद की जाँ छीन गई,
चंद लम्हों में रोमियों की साँस थम गई,
चंद लम्हों का ये खेल..........
चंद लम्हों में ही हम क्या से क्या हुए,
चंद लम्हों में ही हम बेवफा हुए,
चंद लम्हों में ही छीन गई हमसे खुशियाँ,
चंद लम्हों में ही लुट गयी हमारी दुनिया,
चंद लम्हों में ही हम उनसे जुदा हुए,
चंद लम्हों का ये खेल .......
चंद लम्हों में ही हमें हुस्न के जलवे मिले,
चंद लम्हों में ही हमें मौत के फतवे मिले,
चंद लम्हों में मिली खुशी जिन्दगी बनाती है,
चंद लम्हों में ही किसी को तन्हा कर जाती है,
चंद लम्हों में मिली मरने की खुशी,
चंद लम्हों में जीने की आस धूमिल हुई,
चंद लम्हों का ये खेल .............
चंद लम्हों में कोई ........
चंद लम्हों में मिलती नही यहाँ किसी को खुशियाँ II"

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